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संतोषी बुआ को बातें फैलाने का बड़ा शौक था — "मुझे क्या?" कहकर सबकी खबर रखती थीं
🗣️ एक दिन एक "दुर्लभ कौवे" की बात शुरू हुई और देखते-देखते पूरे गाँव में खज़ाने की अफ़वाह फैल गई!
✨ यह kahani हमे सिखाती है कि बिना सोचे-समझे बात आगे बढ़ाने से क्या होता है। और हमे कोई भी बात सोच समझ कर और कहने वाले व्यक्ति का व्यवहार देखकर ही माननी चाहिए।
🐦 देखने के बाद पूछिए: "अगर तुम्हें कोई अजीब बात सुनाए, तो तुम क्या करोगे?"